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भूकंप पर निबंध कैसे लिखें

दोस्तों क्या आप भूकंप पर निबंध खोज रहे हैं तो यह पोस्ट आपके लिए काफी लाभकारी है. इस पोस्ट में आपको बताया गया है कि आप भूकंप पर निबंध कैसे लिख सकते हैं तो आइए जानते हैं –

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है इसका दृश्य काफी भयावह तथा विनाशकारी होता है. भूकंप के आने की सूचना आधुनिक तकनीकों द्वारा भी ज्ञात नहीं की जा सकती. भूकंप के प्रभाव से जान-माल की अधिक हानि होती है तथा भूकंप को रोकने की कोई भी आधुनिक तकनीक अभी तक उपलब्ध नहीं है

भूकंप पर निबंध

भूकंप पर निबंध

प्रस्तावना

मनुष्य का जितना विकास संभव है उतना विनाश भी संभव है. आधुनिक युग में हमें बहुत सारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है जिनमें से कि भूकंप भी एक है. धरती का कंपन होना भूकंप या भूचाल कहलाता है. भूकंप की तीव्रता कभी अधिक तथा कभी कम रहती है भूकंप की अधिक तीव्रता के कारण जान-माल की हानि तथा विनाश जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा

भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिससे बच पाना बहुत कठिन होता है. क्योंकि भूकंप का अभी तक पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सका है. यह 24 घंटे में कभी भी किसी भी समय आ सकता है जिस कारण से यह और भी नुकसानदायक सिद्ध हो गया है

आज तक आए समस्त भूकंप होने न जाने कितने लोगों की जान ले ली है. भूकंप न सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों में बल्कि यह मैदानी क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है. यह विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है. भूकंप में प्रभावित क्षेत्र की जमीन हिलने लगती है जिससे कमजोर इमारतें गिर जाती है

भूकंप से शहर के शहर और गांव के गांव मलबे के ढेर में बदल जाते हैं इनमें दबकर मनुष्य एवं पशुओं की मौत हो जाती है. घनी आबादी वाले क्षेत्र में भूकंप आने से बड़ी मात्रा में जान व माल का नुकसान होता है. रेलवे पुल, सड़क आदि को भी नुकसान पहुंचता है

पृथ्वी के आंतरिक भाग में प्राकृतिक कारकों से हलचल उत्पन्न होती है जिससे अपार ऊर्जा निकलती है. यह ऊर्जा जब धरती से बाहर आने का प्रयास करती हैं तो धरती हिलने लगती है. पृथ्वी के अंदर जिस स्थान से यह ऊर्जा उत्पन्न होती है वह स्थान भूकंप केंद्र कहलाता है. भूकंप केंद्र के ठीक ऊपर धरातल पर भूकंप अधिकेंद्र होता है जिसके आसपास के क्षेत्रों में अधिक हानि होती है

भूकंप से पहले की तैयारियां

भूकंप संवेदी क्षेत्रों की पहचान करना तथा संवेदनशील क्षेत्रों में भूकंप की घटनाओं के प्रति नागरिकों को जागरूक करना आपदा से पहले के कार्य होते हैं

इसके अतिरिक्त उच्च भूमि समिति क्षेत्रों को मानव निवास से बचाना व बड़े बांधों के निर्माण पर रोक लगाना, भवनों के निर्माण में भूकंप रोधी डिजाइन का प्रयोग करना, ऊंची इमारतों के निर्माण को रोकना, भवन निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का प्रयोग करना, भूकंप आने की स्थिति का सामना करने हेतु नागरिकों को प्रशिक्षित करना भूकंप से पहले की तैयारियां हैं

भूकंप के दौरान और बाद क्या करना चाहिए

भूकंप आने के पश्चात और भूकंप आने के दौरान क्या-क्या तैयारी की जा सकती है इसका भी विश्लेषण आवश्यक हो जाता है. भूकंप के दौरान किसी मजबूत वस्तु जैसे मेज तख्त आदि के नीचे बैठना, कमरे के कोने पर खड़े होना, भूकंप के दौरान सीढ़ी से नीचे उतरना और लिफ्ट का प्रयोग ना करना, बिजली का मुख्य स्विच बंद कर देना, खुले स्थान की तरफ जाना और हड़बड़ी आदि ना करना यह आपदा के दौरान किए जाने वाले कार्य है

आपदा के पश्चात मलबे में दबे हुए लोगों को खोज कर बाहर निकालना तथा उनका उपचार करना प्रभावित लोगों हेतु कपड़े, भोजन व शुद्ध पेयजल तथा दवाओं की व्यवस्था करना. प्रभावित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करना आदि आपदा के पश्चात के कार्य हैं

भूकंप के कारण और तीव्रता

गुजरात राज्य के भुज में 26 जनवरी 2001 तथा हाल ही में अप्रैल 2015 में नेपाल में आए भूकंप से अपार जन-धन की हानि हुई थी. भूकंप की उत्पत्ति पृथ्वी की प्लेटों के किसी भाग में असंतुलन उत्पन्न होने से होती है. पृथ्वी की प्लेटों में असंतुलन कई कारणों से उत्पन्न होता है

ज्वालामुखी विस्फोट के कारण या महाद्वीपों महासागरों के संचरण के कारण या फिर बमों के विस्फोट के कारण भूकंप आते हैं. भूकंप की तीव्रता का मापन सिस्मोग्राफ द्वारा रिक्टर मापक के आधार पर किया जाता है. इस मापक की रचना चार्ल्स अफ्रीका ने 1935 ईस्वी में की थी

लेटर मापन पर अंकित अंक भूकंप की तीव्रता एवं परिमाप को इंगित करते हैं. यह 0 से 9 के बीच होते हैं. भूकंप से होने वाले वास्तविक स्थिति तब प्रारंभ होती है जब उसकी तीव्रता रिक्टर मापक पर 5 से अधिक होती है. जब आने वाले भूकंप की तीव्रता मापक 8 या उससे अधिक होती है तो इससे बहुत अधिक विनाश होता है. अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में भूकंप अधिक खतरनाक और विनाशकारी होता है

उपसंहार

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है जिसे कि हमारे द्वारा टाला नहीं जा सकता है. कुछ उपायों को अपनाकर भूकंप से बचा जा सकता है. भूकंप की स्थिति होने पर हमें उपयुक्त उपायों का समझदारी के साथ उपयोग करना चाहिए

प्राकृतिक आपदाओं के बारे में हमें हमारे आस-पास के लोगों को भी जागरूक करना चाहिए जिससे कि वे किसी भी प्राकृतिक आपदा में समझदारी से काम लेकर अपनी और अपनों की जान बचा सके

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संक्षेप में

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