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भीमराव अम्बेडकर जयंती पर भाषण हिंदी में

Ambedkar Jayanti Speech in Hindi :- नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप? उम्मीद है आप अच्छे होंगे. दोस्त क्या आप अम्बेडकर जयंती पर भाषण जानना चाहते हैं तो यह पोस्ट आपके लिए एकदम सही है

हम सब जानते हैं बाबा साहब अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है. 14 अप्रैल हमारे भारतीय संविधान के निर्माता का जन्मदिवस है. तो दोस्त आइए जानते हैं कि अम्बेडकर जयंती पर भाषण किस प्रकार से आप अपने स्कूलों और कॉलेजों में बोल सकते हैं. इस पोस्ट में बड़ा और छोटा दोनों भाषण बताए गए हैं. आप अपनी इच्छा अनुसार चुन सकते हैं

1) भीमराव अम्बेडकर जयंती पर भाषण – Speech On Bhimrao Ambedkar Jayanti in Hindi

Speech On Bhimrao Ambedkar Jayanti in Hindi

“नींद अपनी खोकर जगाया हमको
आंसू अपने गिराकर हंसाया हमको
कभी मत भूलना उस महान इंसान को
कभी मत भूलना उस महान इंसान को
जमाना कहता है बाबासाहेब आंबेडकर जिनको
बाबासाहेब आंबेडकर जिनको”

उपस्थित परम सम्माननीय अतिथिगण, माननीय प्रधानाचार्य जी, शिक्षकगण, सहकर्मचारी और मेरे प्यारे दोस्तों…..! सर्वप्रथम संविधान के स्वर्णकार जिन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था, जिनके पास 30 से ज्यादा प्रकार की डिग्री थी, पहले वह भारतीय जिन्होंने विदेश में अर्थशास्त्र में पी.एच.डी. की और अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के दम पर स्वयं का मार्ग तय किया ऐसी दिग्गज हस्ती डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष में मैं सचिन (आपका नाम) उनके चरणों में अपने श्रद्धा रूपी सुमन अर्पित करते हुए उनको शत-शत नमन करता हूं और आज इस सम्मेलन में आप सबका उपस्थित होने पर हार्दिक अभिनंदन करता हूं

14 अप्रैल का दिन प्रत्येक वर्ष भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जोश के साथ मनाया जाता है इसका एकमात्र कारण है बाबा साहेब की महान सोच और कर्मठ व्यक्तित्व, जो केवल भारतीयों के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक रहा है

दोस्तों दरअसल हम सब ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के व्यक्तित्व को अधिकतर 2 तस्वीरो में रेखांकित करते हुए देखा है एक जहां वे सूट-बूट पहने हाथ में संविधान की किताब को पकड़े संविधान के रचयिता के रूप में हैं और दूसरा दलितों के मसीहा या नेता आरक्षण वाले शख्स के रूप में, परंतु हम जो देख रहे हैं इसमें कितना सच है इस बात का पता तो तभी लग सकता है. जब हम उनकी संघर्षमयी जीवन शैली में हल्का सा प्रकाश डालें

“किसी इंसान को दर्द देना इतना आसान है जितना समुद्र में पत्थर फेंकना और दर्द मिटाना उतना मुश्किल जितना समुद्र में फेंके हुए उस पत्थर को ढूंढना” तो इन पंक्तियों से उनके जीवन का आंकलन लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने जीवन में कितना संघर्ष, कितनी पीड़ा, कितना दर्द सहा होगा

14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में उनका जन्म हुआ. उनकी माता का नाम भीमाबाई और पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था. वे महार जाति से ताल्लुक रखते थे इसलिए समाज उन्हें निचली जाति का मानता था

उस समय पूरा समाज उच्च वर्ग अर्थात उच्च जाति निम्न वर्ग / निचली जाति की सोच से जकड़ा हुआ था. निचली जाति वालों को भेदभाव, घृणा और छुआछूत की दृष्टि से देखा जाता था. निचली जाति वालों को उच्च जाति के साथ एक कुएं से पानी पीने तक का अधिकार नहीं था

निम्न वर्ग के लोगों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं दिया जाता था और साथ ही उस समय महिलाओं को घर से बाहर कदम रखने की इजाजत तक नहीं थी. ऐसी कई कुरीतियां समाज को दीमक की तरह खोखला कर रही थी

बाबासाहेब जो बचपन से ही बुद्धिजीवी, जिज्ञासु और दृढ़संकल्पी रहे उन्होंने छोटे कुल में पैदा होने के इस दर्द को बचपन से ही सहा था. शिक्षा में उन्हें इतनी अधिक रूचि थी कि जब वह शिक्षा पाने स्कूल गए तो वहां पर उन्हें कक्षा में बैठने की अनुमति नहीं थी. उन्हें कक्षा के बाहर बैठाया जाता था वहीं से उन्होंने अपनी रूचि के बल पर शिक्षा प्राप्त की

अगर उन्हें प्यास लग जाती तो अपनी प्यास बुझाने के लिए उन्हें चपरासी का इंतजार करना पड़ता था. खुद से पानी नहीं ले सकते थे क्योंकि वह अछूत थे. ऐसी कई चीजों का भेदभाव का सामना उन्हें करना पड़ा. इस दर्द की चुभन उनके अंतर्मन को झिंझोड देती थी

जब यह दर्द नासूर बन गया तब उन्होंने अपने इरादों को मजबूत किया और संकल्प लिया कि इस कुरीति को समाज से खत्म करना बहुत जरूरी है. भगवान ने तो इंसान को रचा, पर यह क्या ? इंसान ने तो इंसान को बांट दिया

किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए, सभी को सम्मान मिले, समान अधिकार मिले ऐसी इनकी सोच थी. यहीं से शुरू हुई उनकी लक्ष्य प्राप्ति की और फिर क्या ? एक दिन ऐसा आया जब आजादी के बाद इनकी योग्यता को मध्यनजर रखते हुए इन्हें संविधान रचने का मौका मिला

कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने मात्र एक दस्तावेज के माध्यम से, एक लेखनी के माध्यम से, सभी को सम्मान और समान अधिकार देते हुए भारत का नक्शा ही बदल दिया

इनका पूरा परिचय जाने तो यह कहना उचित होगा :- “देश की राजनीति पलटने वाला डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, देश की महिलाओं को अधिकार देने वाला डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, भेदभाव और छुआछूत जैसी घिनौनी कुरीति को खत्म कर देने वाला डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, हर व्यक्ति को समान अधिकार देने वाला डॉक्टर भीमराव अंबेडकर”

दोस्तों अंत में शब्दों को विराम देते हुए यही कहना चाहूंगा कि आज डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती में हम ना केवल इन्हें याद करें बल्कि उन्होंने जो सपना देखा था इसका सहयोग और सम्मान करें

धन्यवाद !

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2) अम्बेडकर जयंती पर भाषण – Ambedkar Jayanti Speech in Hindi

Ambedkar Jayanti Speech in Hindi

माननीय अतिथिगण, प्रधानाचार्य जी, शिक्षकगण और मेरे प्यारे मित्रों. आप सभी को मेरा नमस्कार ! मुझे आप सभी के समक्ष इस भाषण को संबोधित करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम अम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर बाबा साहब अम्बेडकर जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं

उनका पूरा नाम भीमराव रामजी अम्बेडकर था और 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश राज्य के माहो (युद्ध के सैन्य – मुख्यालय) में उनका जन्म हुआ था. इनके पिताजी का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माँ का नाम भीमबाई था

लोग उन्हें प्यार से ‘बाबा साहेब’ कहकर बुलाते थे. उन्होंने 5 वर्ष की उम्र में अपनी माँ को खो दिया था. अपनी बी.ए. की शिक्षा उन्होंने मुम्बई से पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए लिए अमेरिका चले गए और अपनी मास्टर्स और पी.एच.डी. की डिग्री इंग्लैण्ड से प्राप्त की और 1923 में भारत लौट आए

भारत में उन्होंने बॉम्बे के उच्च न्यायालयों में अपनी वकालत शुरू की. उन्होंने सामाजिक कार्य करने के साथ-साथ लोगों को शिक्षा का महत्व भी समझाया. उन्होंने लोगों को अपने अधिकारों के प्रति लड़ने के लिए और जाति व्यवस्था को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया

उन्होंने भारत के संविधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसीलिए उन्हें भारतीय संविधान का रचयिता भी कहा जाता है. डा. भीमराव अम्बेडकर के सामाजिक कार्य और लोगों के उत्थान के प्रति उनके इस योगदान के लिए उन्हें भारत में बहुत सम्मान के साथ याद किया जाता है

14 अप्रैल को अम्बेडकर जयंती के रूप में न केवल हमारे देश में बल्कि दुनिया के हर हिस्सो में भी वार्षिक त्योहार के रूप में मनाया जाता है. प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को पूरे भारत में सार्वजनिक अवकाश होता है

तो चलिए हम सभी इस महत्वपूर्ण दिवस को उल्लास के साथ मनाते हैं और इस देश के समग्र विकास के लिए किए गए उनके सभी कार्यो को याद करते हैं

धन्यवाद !

आज आपने सीखा

आशा है दोस्त आपको अम्बेडकर जयंती पर भाषण (Ambedkar Jayanti Speech in Hindi) अच्छा लगा होगा. अगर आपको यह भाषण अच्छा लगा तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिएगा ताकि उन्हें भी अम्बेडकर जयंती पर स्कूल और कॉलेज में भाषण बोलना आ सके. यह पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

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