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गति के नियम उदाहरण सहित

दोस्तों क्या आप गति के नियम खोज रहे हैं तो यह पोस्ट आपके लिए उपयोगी है. इस पोस्ट में गति का प्रथम नियम, गति का द्वितीय नियम तथा गति का तृतीय नियम उदाहरण सहित स्पष्ट किया गया है

यदि आप 11th फिजिक्स का अध्ययन करते हैं तो गति के नियम पाठ पढ़ने को मिलता है इस पाठ में न्यूटन द्वारा गति के तीन नियमों का उल्लेख किया गया है इसी के बारे में आप जान सकते हैं तो आइए जानते हैं

गति के नियम

फिजिक्स में हमें न्यूटन द्वारा गति के तीन नियमों का उल्लेख मिलता है तो आइए इनके बारे में जानते हैं –

  • गति का प्रथम नियम या जड़त्व का नियम
  • गति का द्वितीय नियम या संवेग का नियम
  • गति का तृतीय नियम या क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम

गति का प्रथम नियम या जड़त्व का नियम

गति का प्रथम नियम – इस नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु विराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में ही बनी रहेगी और यदि वह एक सरल रेखा में एक समान वेग से चल रही है तो वह उसी प्रकार चलती रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन ना किया जाए इसे गैलिलियो का नियम या जड़त्व का नियम भी कहा जाता है

उदाहरण – यदि कोई पुस्तक मेज पर रखी है तो वह तब तक उसी अवस्था में रहेगी जब तक कि उस पर बाहर से कोई बल लगाकर उसे वहां से हटा ना दिया जाए

गति का द्वितीय नियम या संवेग का नियम

गति का द्वितीय नियम – इस नियम के अनुसार किसी पिंड के संवेग परिवर्तन की दर, उस पिंड पर लगाए गए बाह्य बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा उसी दिशा में होती है जिस दिशा में बल कार्य करता है इसे संवेग का नियम भी कहा जाता है .यदि किसी पिंड पर आरोपित बल F है तथा उसका संवेग P है तो इस नियम के अनुसार –

Note – नीचे सूत्र में (dt) समय तथा (/) अनुपात, k अनुक्रमानुपाती स्थिरांक को प्रदर्शित करता है

F = k × dp / dt

उदाहरण – मान लो कि हम विराम अवस्था में स्थित किसी गेंद को बल्ले की सहायता से गति प्रदान करना चाहते हैं यदि हम गेंद पर बल्ले से सीधा प्रहार करते हैं तो गेंद में धीमी गति उत्पन्न होती है अर्थात उसके संवेग में परिवर्तन की दर कम होती है

इसके विपरीत यदि गेंद पर बल्ले से तेज प्रहार करके अधिक बल लगाया जाए तो गेंद में तीव्र गति उत्पन्न होती है अर्थात उसके संवेग में परिवर्तन की दर अधिक हो जाती है. यहां पर भी देखा जाता है कि गेंद में गति बल्ले द्वारा लगाए गए आघात की दिशा में ही उत्पन्न होती है

गति का तृतीय नियम या क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम

गति का तृतीय नियम – इस नियम के अनुसार जब भी कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर बल लगाती है. दोनों वस्तुओं द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए बल परिणाम में बराबर तथा दिशा में विपरीत होते हैं

इन दो बलों में से एक को क्रिया तथा दूसरे को प्रतिक्रिया कहते हैं. इसीलिए इसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम भी कहा जाता है. इस नियम के अनुसार- “प्रत्येक क्रिया की उसके बराबर, परंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है”

उदाहरण – बंदूक से गोली छोड़ने पर गोली क्रिया बल के कारण आगे बढ़ती है. परंतु गोली भी बंदूक पर विपरीत दिशा में उतना ही प्रतिक्रिया बल लगाती है इसीलिए बंदूक स्वयं पीछे की ओर भागती है तथा बंदूक चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का देती है. इससे गति का तृतीय नियम सिद्ध होता है

Read More –

संक्षेप में

दोस्तों उम्मीद है आपको गति के नियम कि यह जानकारी अच्छी लगी होगी. अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी है तो इसे 11th फिजिक्स के स्टूडेंट के साथ जरूर शेयर कीजिएगा जो कि उनकी परीक्षाओं के लिए काफी उपयोगी है. ऐसी जानकारियों को जानने के लिए MDS Blog के साथ जरूर जुड़िए जहां कि आपको कई तरह की शिक्षात्मक जानकारियां दी जाती है

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