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मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध

Meri Priya Pustak Par Nibandh : दोस्तों नमस्कार MDS BLOG में आपका हार्दिक स्वागत है. दोस्त क्या आप मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए यह पोस्ट एकदम सही है

यह निबंध कक्षा 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 तक के सभी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. मेरी प्रिय पुस्तक श्रीरामचरितमानस पर यह निबंध लिखा गया है. तो आइए जानते हैं

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध – Essay on My Favorite Book

मेरी प्रिय पुस्तक पर निबंध, Essay on My Favorite Book, Meri Priya Pustak Par Nibandh

“राम-राज्य फिर लाना होगा,
जीवन का मूल्य बढ़ाना होगा”

प्रस्तावना

इस संसार में बहुत सी पुस्तकें हैं. मैंने अपने जीवन में बहुत सारी पुस्तकों का अध्ययन किया है. उन सभी पुस्तकों में श्री रामचरितमानस सर्वश्रेष्ठ है

यह पुस्तक हमें भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र का अनुकरण करने की प्रेरणा देती है. यह पुस्तक राम राज्य स्थापित करने की उच्च भावना को जगाने वाली है

मेरी प्रिय पुस्तक रामचरितमानस की रचना

श्री रामचरितमानस की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी के द्वारा की गई है. यह अवधी भाषा का एक सर्वोत्कृष्ट महाकाव्य है. तुलसीदास जी की यह कृति इतनी श्रेष्ठ है कि यह संसार की सभी समृद्ध भाषओं में अनुदित हो चुकी है

इस पुस्तक को कवि तुलसीदास का अमर स्मारक माना जाता है. श्रीरामचरितमानस की रचना चौपाई, दोहा, सोरठा, छंद एवं संस्कृत के सुंदर श्लोकों द्वारा हुई है

रामचरितमानस को तुलसीदास जी ने सात काण्डों में विभक्त किया है. सात काण्डों के नाम इस प्रकार हैं – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धा काण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युद्धकाण्ड) और उत्तरकाण्ड

श्रीरामचरितमानस का संक्षिप्त परिचय

श्रीरामचरितमानस में त्रेता युग के दौरान अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम की सम्पूर्ण जीवनगाथा का वर्णन है. इस महाकाव्य के नायक श्रीराम और नायिका माता सीता हैं

इसमें श्रीराम के मर्यादा पुरुषोत्तम रूप का वर्णन किया गया है. माता सीता को एक आदर्श नारी के रूप में दिखाया गया है. इसमें जीवन के हर पहलू को आदर्श रूप में प्रस्तुत किया गया है

श्रीरामचरितमानस में “प्राण जाए पर वचन ना जाई” पर आधारित रघुकुल की आदर्श रीति का बखूबी वर्णन किया गया है

मेरी प्रिय पुस्तक श्रीरामचरितमानस की विशेषताएं

श्रीरामचरितमानस को मानव जीवन हेतु अमूल्य निधि माना जाता है. इसमें पत्नी के अपने पति के प्रति, एक भाई के दूसरे भाई के प्रति, बहु के सास-ससुर के प्रति और पुत्र के माता-पिता के प्रति कर्तव्यों के बारे में उल्लेख किया गया है

यह पुस्तक हिंदी साहित्य का वह सुगंधित फूल है जिसकी सुगंध से तन-मन पुलकित सा हो जाता है. श्रीरामचरितमानस जैसे प्रभावशाली चरित्र चित्रण अन्य किसी भी हिंदी महाकाव्य में देखने को नहीं मिलते हैं

श्रीरामचरितमानस से मिलने वाली प्रेरणा

श्रीरामचरितमानस को पढ़ने से हमें सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याएं आदर्श तरीके से सुलझाने की प्रेरणा मिलती है. इसको पढ़ने से मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है और मानसिक शांति की प्राप्ति मिलती है

एक बार पढ़ने के बाद इसे पुनः पढ़ने को मन करता है. इसे पढ़कर राम राज्य रूपी एक आदर्श राज्य स्थापित करने की प्रेरणा मिलती है. इस पुस्तक के द्वारा हमें धर्म व नीति की राह पर चलकर आदर्श जीवन मूल्यों में वृद्धि करने की प्रेरणा मिलती है

श्रीराम और वीर हनुमान के रूप में भक्त और भगवान के बीच का आलौकिक-अद्भुत सम्बन्ध वर्तमान में भक्ति का मार्ग अपनाने वालों का मार्गदर्शन करता है

उपसंहार

श्रीरामचरितमानस साहित्यिक और धार्मिक दृष्टि से उच्चकोटि की रचना है. यह अपनी श्रेष्ठता और भव्यता का परिचय खुद ही कराती है. यह एक अद्वितीय ग्रन्थ है, जो अत्यंत उपयोगी एवं शिक्षाप्रद है. इसी वजह से यह मेरी प्रिय पुस्तक है

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संक्षेप में

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