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पेड़ की आत्मकथा पर निबंध

पेड़ की आत्मकथा पर निबंध : यदि पृथ्वी पर जीवन बचाना है तो सबसे जरूरी पेड़ों को बचाना है. विकास की प्रगति में पेड़ों का महत्व आज मनुष्य भूलता ही जा रहा है और हर कोई जानता है कि पेड़ों के बिना जीवन की कल्पना भी करना संभव नहीं है

क्या आप पेड़ की आत्मकथा पर निबंध लिखना चाहते हैं तो आप एकदम सही जगह पर आए हैं. पेड़ की आत्मकथा में हम पेड़ की भावनाओं को समझने की कोशिश करेंगे. तो आइए पढ़ते हैं एक सरल निबंध

पेड़ की आत्मकथा पर निबंध

पेड़ की आत्मकथा पर निबंध

“प्रकृति का अनमोल उपहार हूँ
मैं पेड़ हूँ, करता परोपकार हूँ”

मैं एक पेड़ हूँ. मैं प्रकृति की अनमोल विरासत हूँ. मनुष्य का मुझ बिन जीना असम्भव सा है क्योंकि मैं ही जीवनदायिनी ऑक्सीजन का प्रमुख स्रोत हूँ. मैं सभी को ऑक्सीजन देता हूँ और वातावरण से हानिकारक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर लेता हूँ

सूरज की किरणें मुझे अपना भोजन तैयार करने में मदद करती हैं. सभी पशु पक्षी, जीव जंतु और मनुष्य गर्मी से परेशान होकर मेरी ही छाया में विश्राम करते हैं. मेरी शीतल छाया सभी की थकान दूर कर देती है. मैं पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखता हूँ

मैं वर्षा करने में भी सहायक हूँ. मानव जाति को मैं फल, फूल, छाया, ईंधन के लिए लकड़ी और औषधि जैसी जरूरी वस्तुएं प्रदान करता हूँ. पशु और पक्षी मुझ पर ही आश्रित हैं. पशु मेरे पत्तों को खाकर पेट भरते हैं और पक्षी मुझ पर अपना घोंसला बनाते हैं

लेकिन मैं हर समय डरता रहता हूँ कि कहीं मनुष्य अपने फायदे हेतु मुझे काट ना दे. यह डर भी मुझे इसलिए नहीं लग रहा कि मैं अपना जीवन नष्ट होने से डरता हूँ

बल्कि इसलिए लग रहा है कि मेरे नष्ट होने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा. मेरे ना होने से प्रकृति में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती ही चली जाएगी

मनुष्य को ग्लोबल वार्मिंग का सामना करना पड़ेगा. मुझ बिन वर्षा किस प्रकार हो पाएगी, पशु पक्षी भला कैसे मुझ बिन अपना जीवन जी पाएंगे, प्राणिमात्र जल की बूंद बूंद बिन तरसेगा, पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएं बढ़ती जाएंगी

नहीं, मैं तो ऐसा सोचने मात्र से ही इतना भयभीत हो जाता हूँ. तो फिर भला ये मनुष्य क्यूँ नहीं समझता? आखिर क्यूँ मनुष्य वनों की अन्धाधुन्ध कटाई किए ही जा रहा है? क्यूँ मनुष्य अपनी ही आने वाली पीढ़ी को खतरे में डाल रहा है?

मेरे लिए यह समझना असम्भव है किंतु मनुष्य को यह सब जल्द ही समझना होगा. नहीं तो कहीं देर हो गयी तो इसका भुगतान मनुष्य के साथ-साथ निर्दोष जीवों को भी चुकाना होगा

इसीलिए मनुष्य को मेरी कदर करनी ही होगी. प्रकृति और पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने में हम पेड़ महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है

अतः मेरी सभी मनुष्यों से यही उम्मीद है कि वे मेरी इस भूमिका और मेरे महत्व को समझें और मुझे काटने की बजाए मुझे अधिक से अधिक लगाने पर जोर दें

“परवरिश जो तुम मेरी करोगे
आजीवन स्वस्थ और खुशहाल रहोगे”

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संक्षेप में

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