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राष्ट्र की एकता एवं अखंडता में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान पर निबंध

क्या आप राष्ट्र की एकता और अखंडता में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान पर निबंध लिखना चाहते हैं तो आपके लिए यह पोस्ट एकदम सही है

इस पोस्ट में मैंने आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर का राष्ट्रीय एकता में योगदान पर हिंदी निबंध बताया है. चार निबंध इस पोस्ट में लिखे गए हैं आपको जो भी पसंद आए अपनी प्रतियोगिता के लिए आप उसे लिख सकते हैं

राष्ट्र की एकता एवं अखंडता में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान पर निबंध 300 शब्दों में

राष्ट्र की एकता एवं अखंडता में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान पर निबंध

“राष्ट्र की एकता और अखंडता को किया मजबूत
बाबा ने दिया संविधान को ऐसा स्वरूप”

बाबा साहब अंबेडकर एक महान राष्ट्रवादी थे. उन्होंने राष्ट्रहित के लिए अनेकों कार्य किए. उन्होंने भेदभाव तथा जातिवाद को समाप्त करने के लिए अथक प्रयास किए इसके लिए उन्होंने कई सारी कठिनाइयों का भी सामना किया

बाबा साहब सदैव राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रयासरथ रहते थे. इस बात की पुष्टि उनके एक रिपोर्ट के छोटे से अंश से हो जाती है

एक सामाजिक मुद्दे पर उनका मानना था कि – “मैं कर्नाटक को मुंबई से अलग करने के विरुद्ध हूं क्योंकि एक भाषा एक प्रांत का सिद्धांत अमल में लाने के लिए योग्य नहीं है. आज की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि लोगों में संयुक्त राष्ट्रीयता का आभास उत्पन्न किया जाए. उनमें यह भावना नहीं है कि वह सर्वप्रथम भारतीय और बाद में हिंदू, मुस्लिम, कर्नाटकी बल्कि यह भावना कि वह प्रथमतः और अंततः भारतीय है, उत्पन्न की जाये”

यदि यह आदर्श हो तो फिर ऐसी कोई बात नहीं करनी चाहिए जिससे क्षेत्रीयतावाद तथा पृथक-पृथक समूह चेतनाओं का उदय हो. बाबा साहब के अनुसार राष्ट्र की एकता एवं अखंडता बनाए रखने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है

बाबा साहब अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू के काली पलटन इलाके में हुआ. उन्होंने बचपन से ही भेदभाव तथा छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का सामना किया था

उन्होंने तभी यह संकल्प लिया कि देश को इस बीमारी से आजाद करने का वह पूर्णता प्रयास करेंगे तथा उन्होंने इसी प्रयास में अर्थात राष्ट्र की एकता तथा अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना संपूर्ण जीवन लगा दिया. इसी कारण लोगों द्वारा उन्हें आज भी पूजा जाता है

देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए ही बाबा साहब अंबेडकर जी ने संविधान का निर्माण किया तथा संविधान निर्माता बने. उनके बनाए संविधान के नियमों पर चलकर ही हमने अपने देश की एकता तथा अखंडता को बरकरार रखा है

“करके संविधान का निर्माण
बाबा ने किया सबका उद्धार”

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राष्ट्र की एकता और अखंडता में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान

गीता में कहा गया है – ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्’ जिसका अर्थ है – जब जब पृथ्वी पर अधर्म का साम्राज्य स्थापित हो जाता है तब तब अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिए ईश्वर अवतार लेते हैं

अंग्रेजों के शासन काल में जब भारत माता गुलामी की जंजीरों में जकड़ी कराह रही थी. तब उस घड़ी में भी दकियानूसी एवं गलत विचारधारा के लोग मातृभूमि को विदेशियों के चंगुल से मुक्त करने के लिए संघर्ष करने के बजाय मानव-मानव में जाति के आधार पर विभेद करने से नहीं हिचकते थे

ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में कट्टरपंथियों का विरोध कर दलितों का उद्धार करने एवं राष्ट्र में एकता और अखंडता स्थापित करने में जिस महामानव का जन्म हुआ उन्हें ही दुनिया आज डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम से जानती है. वह अपने कर्मों के कारण आज संपूर्ण भारत में ईश्वर के रूप में पूजे जाते हैं

भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ. अंबेडकर जी बचपन से ही अपने प्रति समाज के भेदभाव रूपी अपमान को सहा था इसीलिए उन्होंने इसके खिलाफ संघर्ष की शुरुआत की. उनके द्वारा कई सर्वश्रेष्ठ पुस्तक लिखी गई जैसे 1927 में बहिष्कृत भारत जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय एकता पर बल दिया

सन 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ था. डॉ. भीमराव अंबेडकर जी को पहला कानून मंत्री बनाया गया इसके बाद उन्होंने भारत के संविधान को बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसीलिए आज भी हम उन्हें संविधान निर्माता कहकर पुकारते हैं. अगर दो शब्दों में कहें तो –

“संविधान का निर्माण कर
जिसने भारत को सींचा है
कोई और नहीं मित्रों
वह अंबेडकर आज भी हमारे लिए विजेता”

भारतीय संविधान को बनाने में उन्होंने हर व्यक्ति की आवश्यकता व सम्मान का ध्यान रखा है. उन्होंने एक ऐसे संविधान का निर्माण किया जोकि राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को बनाएं हुए हैं

भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां विभिन्न धर्म, जाति के लोग एक साथ निवास करते हैं किंतु उनके हृदय में ‘हम भारतवासी एक है’ का संगीत हमेशा गूंजता रहता है

डॉ. भीमराव अंबेडकर एक महान व्यक्ति थे जिन्होंने राष्ट्र को एकता एवं अखंडता रूपी सुंदर माला में पिरोया है. जोकि पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी सुगंध फैलाकर आज भी अमर है

“राष्ट्र की एकता और अखंडता का जिसने दिया हमें उपाय
नमन है अंबेडकर आपको संविधान के जो पालनहार”

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भीमराव अंबेडकर पर निबंध

“उच्चतम शिक्षित भारतीय नागरिक का खिताब था पाया
देकर अपना अमूल्य योगदान भारत को अखंड बनाया”

बाबा साहेब के नाम से विख्यात डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे. उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलित वर्गों को सामाजिक भेदभाव से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया

अंबेडकर जी ने किसानों, श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का भी समर्थन किया. उन्हें स्वतंत्र भारत का प्रथम न्याय मंत्री बनाया गया एवं वे भारत गणराज्य के निर्माताओं में से प्रमुख थे

अंबेडकर जी ने दलितों व शोषितों के लिए आवाज उठाई और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध किया. लाखों मजदूरों के साथ मिलकर उन्होंने ट्रेड यूनियनों का गठन किया तथा देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है

डॉ. अंबेडकर ने संविधान निर्मात्री सभा के अध्यक्ष के तौर पर कार्य करके देश की अमूल्य धरोहर संविधान का निर्माण किया. जिससे आज पूरा देश एकजुट है तथा उनके दिखाए रास्ते पर चल रहा है

उस समय में हमारे देश के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति डॉ. भीमराव अम्बेडकर ही थे. अम्बेडकर जी ने समाज की समानता के लिए पूर्ण रूप से काम किया. उन्होने हमेशा दिल से देश और समाज की सेवा की है एवं भाईचारे को बढ़ाया है

उन्होंने हमेशा समाज को जोड़ने की कोशिश की है जिससे देश की एकता को हमेशा बल मिला है. वे हमेशा से ही छुआछूत और जातिगत असमानता के खिलाफ थे. डॉ. अंबेडकर जी ने छुआछूत के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के आंदोलन भी किए

उन्होंने सार्वजनिक आंदोलनों, सत्याग्रहों और जलूसों के द्वारा पेयजल के सार्वजनिक संसाधन समाज के सभी वर्गों के लिये खुलवाने के साथ ही, अछूतों को भी हिंदू मन्दिरों में प्रवेश करने का अधिकार दिलाने के लिये संघर्ष किया

उन्होंने महाड शहर में अछूत समुदाय को भी नगर की चवदार जलाशय से पानी लेने का अधिकार दिलाने के लिये सत्याग्रह चलाया. इस प्रकार उन्होंने भारतीय समाज में फैली असमानता का खुला विरोध कर उसे खत्म करने की भरपूर कोशिश की

स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा, बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद, सत्य, अहिंसा आदि के विषय डॉ. अम्बेडकर की विचारधाराएं थी

छुआछूत को मिटाना, दलित वर्ग में सामाजिक सुधार, बौद्ध धर्म का प्रचार एवं प्रसार, मौलिक अधिकारों की रक्षा, जाति मुक्त समाज की स्थापना, देश में एकता,अखंडता और प्रगति डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रमुख जीवन उद्देश्य थे

बाबा साहेब एक सच्चे राष्ट्रप्रेमी और समाजसेवी थे. उन्होंने सम्पूर्ण जीवन देश हित के कार्यों में लगा दिया

6 दिसंबर 1756 के दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. सन 1990 में, डॉ. अम्बेडकर को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया

“इतिहास का हर एक पन्ना करता है गुणगान
ऐसे कर्मवीर नायक को कोटि कोटि प्रणाम”

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संविधान निर्माण में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान

राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को बनाए रखने में डॉ. अम्बेडकर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. बाबा साहेब आंबेडकर ने केवल राष्ट्र निर्माण हेतु प्रक्रियाओं का ही उद्बोधन नही किया बल्कि डॉ. आंबेडकर ने भविष्य में राष्ट्र की एकता एवं अखंडता को कैसे अक्षुण रखना है इसके उपाय भी बताये

उनका केवल एक ध्येय था कि किसी तरह से यह प्रजातंत्र मजबूत हो. इसके लिये उन्होंने चार सिद्धांत बताये ये सिद्धांत हैं : भारतीयों द्वारा आत्मविश्लेषण, संवैधानिक मार्ग का अनुसरण, नायक की प्रशंसा की फटकार, राजनैतिक प्रजातंत्र के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक प्रजातंत्र की स्थापना

डॉ. आंबेडकर ने इन सिद्धांतों का खुलासा संविधान सभा के अपने कार्यकाल के पूरा करने के अंतिम दिन किया. उन्होंने प्रश्न उठाया कि भारत 26 जनवरी 1950 में गणतंत्र हो जाएगा परन्तु इसकी स्वतंत्रता का क्या होगा? क्योंकि भारत एक बार पहले भी अपनी स्वतंत्रता खो चुका है, क्या कहीं ऐसा फिर से तो नही होगा?

उन्होंने राजा धर तथा जयचंद की याद दिलाई जिन्होंने पहले देश के साथ विश्वासघात किया था. क्या फिर से तो ऐसे व्यक्तियों को हमारे शासन एवं सत्ता में जगह नही मिलेगी ऐसी चिंता उनको सता रही थी. इसलिये उन्होंने संविधान सभा के माध्यम से पूरे भारतीयों से आत्मावलोकन करने की अपील की जिससे यह राष्ट्र और शक्तिशाली हो सके

एक ओर जहाँ आंबेडकर ने भारतीयों से आत्मावलोकन की अपील कि वहीं उनसे यह भी कहा गया कि अगर हमें अपने राष्ट्र को सुदृढ़ बनाना है तो हमें अधिक से अधिक संवैधानिक साधनों का प्रयोग करना चाहिये. अगर हमें अपने प्रजातंत्र को वास्तविकता का जामा पहनाना है तो हमें ऐसा करना होगा

इसका तात्पर्य यह हुआ कि डॉ. आंबेडकर ने कभी भी खूनी क्रान्ति को प्राथमिकता नहीं दी. उन्होंने तो सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा सत्याग्रह तक की मनाही कर दी. उन्होंने कहा कि जहाँ तक हो हमें संवैधानिक संस्थाओं का ही सहारा लेना चाहिये. ये हड़ताल, सत्याग्रह, तालाबन्दी आदि उनके अनुसार सभी अराजकता के व्याकरण हैं. अतः हमें हर दशा में संवैधानिक पद्धति को ही अपनाना चाहिये

राष्ट्र निर्माण एवं प्रजातंत्र की मजबूती के लिये डॉ. आंबेडकर ने नायक स्तुति/पूजा को हानिकारक बताया. उन्होंने इसकी पुरजोर भर्त्सना की (आंबेडकर 1994 1215) उनका मानना था कि भारतीय राजनीति में नायक पूजा होनी नही चाहिये. भारत में धर्म में भक्ति एक प्रबल शाखा रही है. धर्म में भक्ति मार्ग छम्य हैं परन्तु राजनीति में यह मार्ग तानाशाही को जन्म देता है

डॉ. आंबेडकर ने मिल्स को उद्धृत करते हुये कहा कि अगर हमें अपने प्रजातंत्र को मजबूती प्रदान करनी है तो हमें अपनी स्वतंत्रता को महान पुरुषों के भी कदमो में नही रखना चाहिये. क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता के मूल्य पर अपने आप को गौरवान्वित नहीं समझेगा

अतः अगर हमें अपनी संवैधानिक संस्थाओं तथा प्रजातान्त्रिक मूल्यों की सुरक्षा करनी है तो हमें नायक स्तुति बंद करनी चाहिये. वैसे भी भारत में चमत्कारिक व्यक्तित्वों का सदा से ही बोल बाला रहा है. केवल एक और केवल एक आयेगा और हमारे दुःख-दर्द को हर ले जाएगा. इसी कारण हमारी प्रजातान्त्रिक राजनीति व्यक्तिवादी हो गयी है, इसमें विचारधारा समाप्त हो गयी है

राष्ट्र के भविष्य को सुदृढ़ करने हेतु बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा और संविधान सभा को भी बताया कि 26 जनवरी 1950 विरोधाभासी स्थिति में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहाँ राजनीति में तो हमने नागरिकों को समानता दे दी है. राजनीति में हमने ये सिद्धांत लागू कर दिया है – एक आदमी, एक वोट एक वोट एकमूल्य अर्थात् अमीर-गरीब सभी के वोट का मूल्य एक होगा परन्तु सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में ऐतिहासिक कारणों से हम समानता से दूर रहे हैं

अतः हमें शीघ्र अतिशीघ्र राजनीति एवं सामाजिक-आर्थिक जीवन के विरोधाभास को खत्म करना चाहिये नही तो हमारे जनतंत्र पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा. क्योकि डॉ. आंबेडकर का मानना था कि जनतंत्र में समता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व त्रिमूर्ति के समान है

समता के आभाव में स्वतंत्रता का अस्तित्व नामुमकिन है. समता एवं स्वतंत्रता के आभाव में बंधुत्व हो ही नहीं सकता. अतः अगर जनतंत्र की नींव मजबूत करनी है तो समता, स्वतंत्रता तथा बंधुत्व तीनों का होना अतिआवश्यक है तभी राष्ट्र सशक्त हो पायेगा. इसलिए उन्होंने कहा

मुझे वह धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है

डॉ. भीमराव अंबेडकर

FAQ’s – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत के संविधान का निर्माता किसे कहा जाता है ?

भारत के संविधान का निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को कहा जाता है

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म कब और कहाँ हुआ ?

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ

संक्षेप में

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13 Comments

  1. Point nhi banaya esme sir aapne. 5 Point banata to or bhi acha hota .language bhut easy ha to easily redy ho gya .
    Thanku you so much .

    1. फीडबैक के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. हम इसको और बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे

    2. बहुत ही अच्छा था सर बाबा साहेब के जीवन का तथा उनके कार्यों का बहुत अच्छा चित्रण किया👏👏

    1. यह कमेंट पढ़कर बहुत अच्छा लगा. फीडबैक देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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