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गुरुत्वाकर्षण बल क्या है

नमस्कार दोस्तों MDS BLOG में आपका स्वागत है आज हम जानेंगे कि गुरुत्वाकर्षण बल क्या है – What is Gravity in Hindi और गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम क्या है तथा आर्कमिडीज का सिद्धांत क्या है दोस्तों अगर आप स्टूडेंट हैं तो यह पोस्ट खासतौर पर आप ही लोगों के लिए तैयार की गई है जिससे कि आप गुरुत्वाकर्षण बल की पूरी जानकारी सरल शब्दों में जान सकते हैं.

किसी वस्तु की चाल या गति की दिशा बदलने के लिए बल की आवश्यकता होती है हम सदैव देखते हैं कि जब किसी वस्तु को ऊँचाई से गिराया जाता है तो वह पृथ्वी की ओर ही गिरती है. हम जानते हैं कि सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है.

इन सभी अवस्थाओं में, वस्तुओं पर, ग्रहों पर तथा चंद्रमा पर लगने वाला कोई बल अवश्य होना चाहिए. आइजक न्यूटन इस तथ्य को समझ गए थे कि इन सभी के लिए एक ही बल उत्तरदायी है इस बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं.

गुरुत्वाकर्षण बल क्या है – What is Gravity in Hindi

गुरुत्वाकर्षण बल क्या है – What is Gravity in Hindi 

विश्व के सभी पिंड एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं वस्तुओं के बीच यह आकर्षण बल गुरुत्वाकर्षण बल (Gravity) कहलाता है. दोस्तों अगर दूसरे शब्दों में गुरुत्वाकर्षण बल को समझा जाए तो किन्ही दो वस्तुओं के मध्य लगने वाला आकर्षण बल ही गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है.

गुरुत्वाकर्षण बल का सिद्धांत न्यूटन ने ही दुनिया के सामने रखा आपने देखा होगा कि आप किसी भी वस्तु जैसे कि उदाहरण के लिए आप  पत्थर को आसमान की और फेंकते हैं तो वह स्वयं ही पृथ्वी की ओर आकर्षित होने लगता है पृथ्वी की ओर आकर्षित होने में जो बल कार्य करता है वह गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है.

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम

विश्व का प्रत्येक पिंड प्रत्येक अन्य पिंड को एक बल से आकर्षित करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है. यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है किन्हीं दो एकसमान पिंडों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल उनके केन्द्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में निर्देशित होता है यह गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहलाता है.

मान लीजिए दोनों पिंडों के बीच आकर्षण बल F है. गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, दोनों पिंडों के बीच लगने वाला बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती है अर्थात्, F = M × M तथा दोनों पिंडों के बीच लगने वाला बल उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती है.

अर्थात्, जहाँ G एक अनुपातिकता स्थिरांक है और इसे सार्वत्रिक गुरुत्वीय स्थिरांक कहते हैं. बल, दूरी तथा द्रव्यमान के मात्रक प्रतिस्थापित करने पर हमें G के SI मात्रक प्राप्त होंगे. हैनरी वैफवेंडिस ने एक सुग्राही तुला का उपयोग कर G का मान ज्ञात किया G का वर्तमान मान्य मान 6.673 × 10-11 N है.

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की सफलतापूर्वक व्याख्या करता है जो असंभव मानी जाती थी – हमें पृथ्वी से बांधे रखने वाला बल, पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति, सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति तथा चंद्रमा तथा सूर्य के कारण ज्वार-भाटा

मुक्त पतन क्या है

पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. पृथ्वी के इस आकर्षण बल को गुरुत्वीय बल कहते हैं अतः जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर के बल यानि इसी बल के कारण गिरती हैं हम कहते हैं कि वस्तुएँ मुक्त पतन में हैं वेग में कोई भी परिवर्तन त्वरण को उत्पन्न करता है.

जब भी कोई वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, त्वरण कार्य करता है. यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण है इसलिए इस त्वरण को पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण या गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं. इसे G से निर्दिष्ट करते हैं G के मात्रक वही हैं जो त्वरण के हैं अर्थात् MS^-2

सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक, G = 6.7 × 10–11 NM^2 KG^-2
पृथ्वी का द्रव्यमान, M = 6 × 10^24 KG
पृथ्वी की त्रिज्या, R=6.4 × 10^6 M

दोस्तों गुरुत्वाकर्षण क्या है (Gravity in Hindi) आपने जान ही लिया है अब इससे संबंधित एक छोटी सी जानकारी द्रव्यमान तथा भार के बारे में भी जान लेते हैं

द्रव्यमान क्या है

पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को एक निश्चित बल से आकर्षित करती है और यह बल वस्तु के द्रव्यमान (M) तथा पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण (G) पर निर्भर है. किसी वस्तु का द्रव्यमान (भार) वह बल है जिससे यह पृथ्वी की ओर आकर्षित होती है हमें ज्ञात है कि

F= M×G

भार क्या है

वस्तु पर पृथ्वी का आकर्षण बल वस्तु का भार कहलाता है. इसे W से निर्दिष्ट करते हैं इसे समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर W= M×G क्योंकि वस्तु का भार एक बल है जिससे यह पृथ्वी की ओर आकर्षित होता है, भार का SI मात्रक वही है जो बल का है, अर्थात् न्यूटन भार एक बल है जो उर्ध्वाधर दिशा में नीचे की ओर लगता है, इसलिए इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं.

किसी दिए हुए स्थान पर हम वस्तु के भार को उसके द्रव्यमान की माप के रूप में उपयोग कर सकते हैं. किसी वस्तु का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर, चाहे पृथ्वी पर या किसी अन्य ग्रह पर, उतना ही रहता है जबकि वस्तु का भार इसके स्थान पर निर्भर करता है.

चंद्रमा पर वस्तु का भार कितना होता है

हमने सीखा है कि पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है. इसी प्रकार, चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे चंद्रमा उस वस्तु को आकर्षित करता है. चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी की अपेक्षा कम है इस कारण चंद्रमा वस्तुओं पर कम आकर्षण बल लगाता है.

आर्कमिडीज का सिद्धांत – Archamidis Theory in Hindi

आर्कमिडीज के सिद्धांत द्वारा प्राप्त होता है – जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबोया जाता है तो वह ऊपर की दिशा में एक बल का अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है.

आर्कमिडीज के सिद्धांत के बहुत से अनुप्रयोग हैं यह जलयानों तथा पनडुब्बियों के डिजाईन बनाने में काम आता है. दुग्धमापी, जो दूध के किसी नमूने की शुद्धता की जाँच करने के लिए प्रयुक्त होते हैं तथा हाइड्रोमीटर, जो द्रवों के घनत्व मापने के लिए प्रयुक्त होते हैं, इसी सिद्धांत पर आधरित हैं.

Gravity in Hindi Important Point

गुरुत्वाकर्षण के नियम के अनुसार किन्हीं दो पिंडों के बीच आकर्षण बल उन दोनों के द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है.

यह नियम सभी पिंडों पर लागू होता है चाहे वह विश्व में कहीं भी हों। इस प्रकार के नियम को सार्वत्रिक नियम कहते हैं

गुरुत्वाकर्षण एक क्षीण बल है

पृथ्वी द्वारा लगाए जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व बल कहते हैं

गुरुत्वीय बल पृथ्वी तल से ऊँचाई बढ़ने पर कम होता जाता है. यह पृथ्वी तल के विभिन्न स्थानों पर भी परिवर्तित होता है और इसका मान ध्रुवों से विषुवत वृत्त की ओर घटता जाता है

किसी वस्तु का भार, वह बल है जिससे पृथ्वी उसे अपनी ओर आकर्षित करती है

किसी वस्तु का भार, द्रव्यमान तथा गुरुत्वीय त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है

किसी वस्तु का भार भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न हो सकता है, किन्तु द्रव्यमान स्थिर रहता है

सभी वस्तुएँ किसी तरल में डुबाने पर उत्प्लावन बल का अनुभव करती हैं

जिस द्रव में वस्तुओं को डुबोया जाता है उसके घनत्व से कम घनत्व की वस्तुएँ द्रव की सतह पर तैरती हैं. यदि वस्तु का घनत्व, डुबोए जाने वाले द्रव से अधिक है तो वे द्रव में डूब जाती हैं

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संक्षेप में – Gravity in Hindi

दोस्तों उम्मीद है आपको बताई गई जानकारी गुरुत्वाकर्षण क्या है – Gravity in Hindi और गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम तथा आर्कमिडीज का सिद्धांत क्या है जरूर पसंद आई होगी. अगर आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इसे शेयर जरूर कीजिएगा ताकि और लोग भी गुरुत्वाकर्षण (Gravity in Hindi) के बारे में जान सकें

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