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आरटीई (RTE) क्या है – RTE act 2009 in Hindi

नमस्कार दोस्तों क्या आप आरटीई क्या है – What is RTE in Hindi खोज रहे हैं. तो आज की इस पोस्ट में आपको RTE act 2009 in Hindi के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी. दोस्तों RTE जिसे कि Right To Education यानी शिक्षा का अधिकार कहा जाता है इसके बारे में संपूर्ण जानकारी आज आपको यहां जानने को मिलेगी

किसी भी देश के विकास में सबसे महत्वपूर्ण योगदान शिक्षा का होता है. इसी कारण प्रत्येक राष्ट्र द्वारा शिक्षा व्यवस्था में निरंतर सुधार करने की हर संभव कोशिश की जाती है. अतीत में संसार को प्रेम-शक्ति का संदेश देने और ज्ञान विज्ञान का पाठ पढ़ाने वाला विश्वगुरु के नाम से विख्यात हमारा भारत देश आज भी शिक्षा का महत्व भली-भांति जानता है

यही कारण है कि आज हमारा देश साहित्य, संगीत, कला, विज्ञान आदि सभी क्षेत्रों में और देशों की तुलना में काफी आगे है. बल्कि दुनिया के सबसे बड़े-बड़े विकसित देशों को भी हमारा देश चुनौती दे रहा है

दोस्तों आज विश्व के सभी राष्ट्रों द्वारा भारतीय युवाओं की प्रतिभा का मुक्त गुणगान इसका प्रमाण है. लेकिन संपूर्ण राष्ट्र की शिक्षा को आधार मानकर विश्लेषण किया गया है कि अभी भी भारत में शिक्षा का क्षेत्र विकसित राष्ट्रों की तुलना में काफी पिछड़ा हुआ है

जनगणना के अनुसार भारत देश की साक्षरता दर 74% थी जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम है. इस अनुपात में वृद्धि करने के लिए भारत के विशेषज्ञों द्वारा अपने-अपने विभिन्न तरह के सुझाव दिए गए

उन सभी के सुझाव पर विचार करते हुए भारत सरकार ने शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू करने हेतु शिक्षा का अधिकार कानून (RTE act) या Right of Children to Free and Compulsory Education Act बनाकर पूरे देश में सम्मान के साथ इसे प्रस्तुत किया. आइए आसान शब्दों में समझाता हूं

आरटीई क्या है – What is RTE in Hindi

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RTE यानी कि जिस का फुल फॉर्म Right to Education है को भारत सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2010 को पूरे देश में लागू किया गया जिसके अंतर्गत 6 से लेकर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य रूप से निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी. तब से शिक्षा का अधिकार भारत के मौलिक अधिकारों में शामिल है. आइए अब आपको RTE act 2009 in Hindi के बारे में और संक्षेप में बताता हूं

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 – RTE act 2009 in Hindi

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, 1 अप्रैल 2010 से संपूर्ण भारत में लागू कर दिया गया था इसका मुख्य उद्देश्य 6 से लेकर 14 वर्ष आयु तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य गुणवत्तायुक्त शिक्षा को उपलब्ध कराना था

इस अधिनियम को सर्वशिक्षा अभियान तथा वर्ष 2005 के विधेयक का ही संशोधन कहा जाए तो गलत नहीं होगा. वर्ष 2002 में संविधान के 86 संशोधन द्वारा आर्टिकल 21-A के भाग 3 द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया गया था

शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए 4 अगस्त 2009 को यह अधिनियम पारित कर दिया गया था तथा 1 अप्रैल 2010 से इसे भारत में लागू कर दिया गया था. इसी सफलता के साथ भारत विश्व के उन देशों में शामिल हो गया जिन्होंने की शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया है

इस एक्ट के पास होने के बाद भारतीय इतिहास में पहली बार ऐसा देखा गया कि किसी प्रधानमंत्री ने कानून को अपने संबोधन द्वारा जनता के सामने प्रस्तुत किया

अपने इस संदेश में तत्कालीन प्रधानमंत्री जी श्री मनमोहन सिंह ने बोला कि – भारत नौजवानों का देश है तथा बच्चों और नौजवानों को उचित शिक्षा एवं उनके विशिष्ट गुणों का परिमार्जन करके देश को शक्तिशाली और विकसित बनाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा

RTE Act के प्रमुख प्रावधान

RTE Act के अंतर्गत जिन प्रावधानों को प्रमुखता दी गई है उनमें विशेष रूप से 6 से 14 आयु वर्ग के सभी बच्चों को मुफ्त एवं आधारभूत अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना है

इसके अंतर्गत अनिवार्य शिक्षा से अभिप्राय यह है कि सरकार द्वारा इस आयु के सभी बच्चों को आवश्यक रूप से विद्यालय में दाखिला तथा साथ ही शिक्षा दी जाएगी तथा उनसे कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा संपूर्ण शिक्षा निशुल्क प्रदान होगी

क्षेत्रीय सरकारों, अधिकारियों तथा अभिभावकों का शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रति दायित्व केंद्र व राज्य सरकार द्वारा निश्चित रूप से उठाया जाएगा. कोई भी बच्चा किसी भी समय विद्यालय में प्रवेश लेने के लिए स्वतंत्र है

आयु प्रमाण पत्र न होने के बावजूद, बच्चे को विद्यालय में प्रवेश दिया जा सकता है. बच्चों की आवश्यकता का ध्यान रखते हुए पुस्तकालय, खेल के मैदान, विद्यालय तथा कक्षाओं का निर्माण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा

शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए 35 छात्रों पर एक शिक्षक का प्रावधान किया गया है तथा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किसी भी तरह का अनुपात प्रभावित न हो, इसके साथ ही अध्यापक की गुणवत्ता को देखने के लिए केवल प्रशिक्षित अध्यापकों को ही नियुक्त करने का आदेश दिया गया है

भारत सरकार द्वारा समय-समय पर राज्य के RTE अधिनियम के अंतर्गत हर तरह की निगरानी रखी जाती है तथा एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली के अंतर्गत शैक्षिक आंकड़े एकत्रित किए जाते हैं. जिससे कि भारत में साक्षरता दर अनुमानित की जा सके. इसके लिए हमारे माता-पिता और सरकार के भी कुछ दायित्व है आइए इन पर चर्चा करते हैं –

RTE में मातापिता का दायित्व

इस अधिनियम के अंतर्गत सरकार और स्थानीय अधिकारी अपने अपने क्षेत्र के अधीन जिन स्थानों पर विद्यालय उपस्थित नहीं है. वहां 3 वर्ष के अंदर विद्यालय स्थापित करेंगे तथा माता-पिता अपने बच्चों को नजदीकी विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे इस अधिनियम के अंतर्गत यही माता-पिता का दायित्व है

RTE में केंद्र सरकार का दायित्व

RTE में केंद्र सरकार का दायित्व शैक्षिक अधिकारों की मदद से ढांचा विकसित करना है जोकि निम्नलिखित विषयों पर है

1 – बच्चों का विकास
2 – संवैधानिक मूल्यों का विकास
3 – मातृभाषा में शिक्षा का विकास
4 – बच्चों का मानसिक विकास
5 – बच्चों को भयमुक्त माहौल प्रदान करना
6 – बच्चों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विकास करना

RTE में राज्य सरकार का दायित्व

इस अधिनियम में राज्य सरकार प्रत्येक बच्चों को निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास करेगी. अपने क्षेत्र में 14 वर्ष तक के सभी बच्चों का पूर्ण रिकॉर्ड राज्य सरकार द्वारा रखा जाएगा यही राज्य सरकार की इस अधिनियम में भूमिका है

RTE Act मे संशोधन

दोस्तों शिक्षा को मौलिक अधिकार घोषित करने से बच्चों के विकास में कुछ तेजी आई है. परंतु मात्र अधिकार घोषित करने से शिक्षा को पूर्ण रूप से बढ़ावा नहीं मिल पाएगा

वर्तमान में अनेक पिछड़े हुए राज्य ऐसे हैं जहां कि शिक्षक की कमी, प्रशिक्षित शिक्षक का अभाव है. जिसके परिणाम स्वरूप संभावित लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहा है तथा शिक्षा की उपयोगिता पर प्रश्न चिन्ह भी उठ रहा है. शिक्षा का अधिकार 2009, सफलतापूर्वक लागू न होने के कारण वर्ष 2017 में इसमें नया संशोधन किया गया

इस संशोधन के अंतर्गत बच्चों के विकास हेतु यह प्रावधान आया कि 5वीं तथा 8वीं कक्षा में फेल सभी कमजोर बच्चों को पुनः परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएगा. इस प्रकार कमजोर बच्चों को शिक्षा के अधिकार की वास्तविकता में सफल बनाने का हर संभव प्रयास किया गया

अतः इसके लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता तथा विभिन्न तरह के सहायक अभियानों का भी सहारा लिया गया. तभी शिक्षित व समर्थ राष्ट्र की कल्पना साकार हो सकती है

इसीलिए कहा जा सकता है कि किसी भी देश का भविष्य शिक्षक नागरिकों पर ही निर्भर है. शिक्षा द्वारा ही राष्ट्र की शक्ति व समृद्धि का विकास हो सकता है. भारत सरकार ने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है

प्रत्येक भारतीय को आशा है कि राज्य व केंद्र सरकार के परस्पर सहयोग और भारतीय जनता के संयुक्त प्रयास से भारत देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर किया जाएगा. इस लेख से कुछ उपयोगी प्रश्न नीचे प्रस्तुत किए गए हैं उन्हें भी पढ़िए –

Read This – NRC क्या है और इसका फुल फॉर्म

आरटीई या शिक्षा का अधिकार कब लागू हुआ ?

Ans → भारतीय संसद में 4 अगस्त 2009 को आरटीई एक्ट पारित हुआ था तथा 1 अप्रैल 2010 से देश में लागू हुआ था

आरटीआई का फुल फॉर्म क्या होता है ?

Ans → आरटीआई का फुल फॉर्म = Right to Education होता है जिसे हिंदी में शिक्षा का अधिकार कहा जाता है

आर्टिकल 21-a क्या है ?

Ans → आर्टिकल 21-a शिक्षा का अधिकार है. जिसके अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी

संक्षेप में

दोस्तों उम्मीद है आपको आरटीई क्या है – What is RTE in Hindi या RTE act 2009 in Hindi अच्छा लगा होगा. अगर आपको यह जानकारी कुछ काम की लगी है तो इसे जरूर सोशल मीडिया पर शेयर कीजिएगा

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